धरती कथा जमीन और संपत्ति के सवाल पर लिखा एक परिवर्तनकारी एवं लोक बोधी उपन्यास
i धरती कथा जमीन और संपत्ति के सवाल पर लिखा एक परिवर्तनकारी एवं लोक बोधी उपन्यास है। आइए उपन्यास की भूमिका देखें----- आखिर कब तक बंद रहेंगे हम आधुनिकता तथा उत्तर आधुनिकता के बाजार के कार्टूनों में-- - किसी आज्ञाकारी की तरह बोलने तथा न बोलने के बारे में हमें बाजार से पूछ लेना चाहिए क्योंकि हम बाजार में हैं और वही हमारी जिंदगी यों का नियामक भी है लेकिन छोड़िए यह तो उपन्यास है उपन्यास नहीं बोलते इसे कौन नहीं जानता। उपन्यास तो वह सब भी नहीं कर सकते जिसे करने के लिए कुदरत खुली छूट देती है इस खुली छूट के बाद भी अगर उपन्यास कुछ कर सकते तो प्रेमचंद जी के सारे पात्र आज गली गली गांव गांव रोते चीचीयाते नहीं मिलते अपनी दरिद्रता से पूरित अस्मिता के साथ । इसीलिए आधुनिक तथा उत्तर आधुनिक उपन्यासों के केंद्र में वे अब नहीं है प्रेमचंद के उपन्यासों के नायक तो तबके हैं जब हम गुलाम थे आज हम गुलाम नहीं है। सो नायक चुनने का तरीका भी हमारा बदल चुका है और अब हमारे नायक भी बाजार के उत्पाद जैसे हो गए हैं उन्हें कहीं भी देख सकते हैं किसी भी गली में किसी भी चौराहे पर ललकारते हुए की अरे भाई हमस...