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रामनाथ शिवेन्द्र के उपन्यासों में जनचेतना

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रामनाथ   शिवेन्द्र   के   उपन्यासों   में जनचेतना           सीमांत   की   संघर्ष   गाथा   रामनाथ   शिवेंद्र   का   उपन्यास           ‘ हरियल   की   लकड़ी ’                               अरविन्द   चतुर्वेद दुनिया   के   जिस  ‘ सबसे   बड़े   लोकतंत्र ’  में   हम   रहते   हैं ,  आज़ादी   के   अठ्ठावन   साल   बाद   आज   भी   सीमांत   पर   कई   ऐसी   जिन्दगियां   हैं   जिन्हें   आज़ादी   की   रोशनी   मयस्सर   नहीं ,  उलटे   तंत्र   के   शिकंजे   में   वे   छटपटा   रही   हैं।   विकास   की   संजीवनी ...